
जशपुरनगर । शासकीय विजय भूषण सिंहदेव कन्या महाविद्यालय, जशपुर के वनस्पति विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का भव्य समापन हुआ। 26 और 27 फरवरी को आयोजित इस गरिमामयी संगोष्ठी में देश-दुनिया के वैज्ञानिकों ने जल, जंगल और जमीन को बचाने के लिए गंभीर मंथन किया।मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन में अनुशासन और शोध पर जोरसमापन समारोह के मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय रहे। उन्होंने छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से न केवल शोध के प्रति रुचि जागृत होगी, बल्कि वैश्विक संस्थानों के साथ भविष्य में काम करने के अवसर भी खुलेंगे।

उन्होंने अनुशासन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि माता-पिता और शिक्षकों का मार्गदर्शन ही उज्ज्वल भविष्य की नींव है।सेमिनार के प्रथम दिवस के मुख्य अतिथि और भारत के प्रसिद्ध ‘जल पुरुष’ डॉ. राजेंद्र सिंह ने अपने संबोधन में गहरी चेतावनी और समाधान दोनों प्रस्तुत किए।सभ्यता का संकट उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस समाज में नीर (जल), नदी और नारी का सम्मान नहीं होता, वह सभ्यता नष्ट हो जाती है। चंबल का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि कैसे जल संरक्षण ने वहां के लोगों को मुख्यधारा में वापस लाया।जंगल और जल का संबंध: डॉ. सिंह ने वैज्ञानिक तथ्य साझा करते हुए बताया कि बड़े पेड़ों वाले जंगलों में ‘वर्टिकल’ (लंबवत) जल स्रोत होते हैं जो पानी को धरती के भीतर सुरक्षित रखते हैं।

उन्होंने बताया कि एक पीपल के पेड़ के मूल रोमों में लगभग 80 हजार लीटर पानी संचित रहता है।पारंपरिक भारतीय ज्ञान की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने आधुनिक तकनीक के साथ पारंपरिक ज्ञान को जोड़ने पर बल दिया ताकि ‘सनातन’ विकास सुनिश्चित हो सके।बांकी नदी पर चिंता और जशपुर का भविष्य डॉ. राजेंद्र सिंह ने जशपुर की बांकी नदी की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि नदी के उद्गम और बहाव क्षेत्र से अतिक्रमण नहीं हटाया गया,

तो जशपुर को जल्द ही भारी जल संकट का सामना करना पड़ेगा।सेमिनार के दौरान महाविद्यालय की छात्राओं ने मुख्य अतिथि सालिक साय के समक्ष कॉलेज में एक 250 सीटर ऑडिटोरियम की मांग रखी। छात्राओं के उत्साह और आवश्यकता को देखते हुए मुख्य अतिथि ने इस मांग को तुरंत स्वीकार कर लिया, जिससे महाविद्यालय परिवार में हर्ष की लहर है।सेमिनार के प्रमुख बिंदु और भागीदारीयह सेमिनार ‘हाइब्रिड मोड’ ऑनलाइन और ऑफलाइन में आयोजित किया गया था, जिसमें वैश्विक स्तर पर विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।इस सेमिनार में विदेशी वक्ता प्रो. शिवकुमार वेंकटरमण (दक्षिण अफ्रीका), डॉ. एडिना डीकू (जर्मनी), डॉ. रविकांत चतुर्वेदी (चीन)भारतीय विशेषज्ञ पूर्व कुलपति प्रो. प्रेम प्रकाश सिंह, प्रो. लालजी सिंह, डॉ. रविन्द्र शुक्ला, डॉ. विनोद वर्मा सहित अन्यशोध पत्र कुल 33 शोध पत्र पढ़े गए और 12 विशेष व्याख्यान हुए।

सहभागी राज्य उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, झारखंड और पंजाबमुख्य अतिथि श्री सालिक साय के द्वारा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले शोधार्थियों को पुरस्कृत भी किया गया।बेस्ट ओरल प्रेजेंटेशन के लिए चंद्रकला पिपरिया, निर्मल नेताम, सादिया परवीन, आकांक्षा चंद्राकर एवं अन्नपूर्णा देवी।बेस्ट पोस्टर प्रेजेंटेशन के लिए लक्ष्मी सिंह, साक्षी मिश्रा, विनीता केरकेट्टा और गोमती राजवाड़े।इस दौरान जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार और डिप्टी कलेक्टर प्रशांत कुशवाहा ने भी डॉ. राजेंद्र सिंह से मुलाकात कर जशपुर जिले में जल संरक्षण और संवर्धन की रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा की।मुख्य अतिथि श्री सालिक साय ने कहा कि इस आयोजन ने जशपुर को अंतरराष्ट्रीय पटल पर पहचान दिलाई है। सेमिनार के निष्कर्षों से न केवल शोध जगत को लाभ होगा, बल्कि स्थानीय पर्यावरण नीतियों को बनाने में भी मदद मिलेगी। कार्यक्रम में नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद भगत, नरेश गुप्ता,जिला उपाध्यक्ष भाजयुमो भूषण वैष्णव भी शामिल हुए कार्यक्रम का सफल संचालन डी.आर. राठिया एवं अनूप लकड़ा द्वारा किया गया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अनुज कुमार द्विवेदी ने दिया।
