
नारायणपुर। नारायणपुर क्षेत्र के हस्तिनापुर में मूली पड़हा हस्तिनापुर कुडूख उरांव आदिवासी समाज द्वारा प्रकृति पूजा का महान पर्व सरहुल पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ बड़े ही धूमधाम से मनाया गया।

इस आयोजन में क्षेत्र के लगभग 45 गांवों के ग्रामीण और समाजजन शामिल हुए, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्सव और एकजुटता का माहौल देखने को मिला।कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक वेशभूषा में समाज के महिला-पुरुषों ने नृत्य-गीत प्रस्तुत किए और प्रकृति तथा साल वृक्ष की पूजा कर समाज की समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।

सरहुल पर्व को उरांव समाज की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक माना जाता है, इसलिए पूरे आयोजन में परंपराओं और रीति-रिवाजों का विशेष रूप से पालन किया गया।कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में दीवान जी, अरविंद निराला जी एवं सुरेंद्र भगत जी उपस्थित रहे।

उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि आदिवासी समाज को मजबूत बनाने के लिए शिक्षा, एकता और अपनी संस्कृति का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने समाज के लोगों से अपील की कि वे अपनी परंपराओं को सहेजते हुए समाज के विकास और कल्याण के लिए लगातार कार्य करते रहें।

इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता विकास नाग ने कहा कि सरहुल केवल एक पर्व नहीं बल्कि आदिवासी समाज की पहचान और प्रकृति के प्रति आस्था का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन समाज को जोड़ने और अपनी संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।कार्यक्रम में युवा वर्ग की सक्रिय भागीदारी भी देखने को मिली। रानी पूजा, शत्रुघ्न भगत एवं अरविंद निराला ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज के युवाओं को शिक्षा और खेल के माध्यम से समाज को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए। यदि युवा संगठित होकर आगे बढ़ें तो समाज राज्य और देश में एक मिसाल बन सकता है।उन्होंने यह भी कहा कि रानी पूजा और शत्रुघ्न भगत ,वीरेंद्र भगत लगातार नारायणपुर क्षेत्र में समाज के हितों और जागरूकता को लेकर सक्रिय रहते हैं और युवाओं को समाज के विकास के लिए प्रेरित करते रहते हैं।सरहुल पर्व के इस आयोजन में क्षेत्र के विभिन्न गांवों से आए समाजजनों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपनी परंपराओं, संस्कृति तथा सामाजिक एकता का संदेश दिया।

