रोगमुक्त भारत का संकल्प: जशपुर पहुँचे रानी लक्ष्मीबाई के वंशज वैभव साठे, ‘रामचरितमानस’ से जोड़ा स्वास्थ्य का सूत्र

जशपुर/कुनकुरी।“स्वस्थ रहेगा भारत, तभी तो आगे बढ़ेगा भारत” का ओजस्वी नारा देने वाले और वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई के छठे वंशज वैभव साठे (वैभव दादा) अपने दो दिवसीय प्रवास पर जशपुर पहुँचे। जशपुर की पावन धरा पर उनके आगमन से क्षेत्र के प्रबुद्धजनों और सनातन प्रेमियों में खासा उत्साह देखने को मिला। शनिवार को कुनकुरी प्रवास के दौरान उन्होंने कई कार्यक्रमों में भाग लिया और भारतीय दर्शन तथा रामचरितमानस आधारित स्वास्थ्य आहार प्रणाली पर विस्तार से चर्चा की।जैन समाज ने किया आत्मीय स्वागतकुनकुरी पहुँचने पर जैन समाज के प्रदेश अध्यक्ष गजेंद्र जैन ने वैभव साठे का आत्मीय स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने जैनाचार्यों के साथ बिताए अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने विशेष रूप से आचार्य विद्यासागर जी महाराज द्वारा पान के पत्ते की क्षारीयता (Alkalinity) पर दिए गए वैज्ञानिक ज्ञान का उल्लेख करते हुए बताया कि हमारे पूर्वजों की परंपराएँ पूर्णतः विज्ञान सम्मत थीं।उन्होंने आचार्य पुलक सागर महाराज के विचार को भी दोहराते हुए कहा कि “बिना धन के कोई सामाजिक या राष्ट्रव्यापी क्रांति संभव नहीं है।”सनातन और आरोग्य पर हुआ मंथनइसके बाद वैभव साठे एकल अभियान के प्रदेश प्रमुख स्वयंसेवक राजीव नंदे के निवास पहुँचे, जहाँ सनातन संस्कृति और आरोग्य पर विस्तृत चर्चा हुई।

राजीव नंदे ने बताया कि एकल अभियान के लगभग 5,000 विद्यालय ग्रामीण क्षेत्रों में आरोग्य और सामाजिक उत्थान के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं।चर्चा के दौरान वैभव साठे ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से हुई अपनी मुलाकात और ‘सीता रसोई’ की अवधारणा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की जड़ें इतनी गहरी हैं कि आधुनिक विज्ञान भी आज आश्चर्यचकित रह जाता है।उन्होंने कहा कि विदेशी कंपनियों ने हमारे पारंपरिक आहार के गुणों को अपनाकर आज वही चीजें हमें महंगे दामों में बेचनी शुरू कर दी हैं। गेहूं, बर्गर, पिज्जा और कोल्डड्रिंक जैसी आदतों ने हमें आधुनिक दवाओं पर निर्भर बना दिया है।मर्म चिकित्सा शिविर का लिया संकल्पजशपुर के समृद्ध वनवासी जीवन और प्राकृतिक संस्कृति को नमन करते हुए वैभव साठे ने घोषणा की कि निकट भविष्य में जिले में विशाल मर्म चिकित्सा शिविर का आयोजन किया जाएगा, जिससे स्थानीय लोगों को प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति का लाभ मिल सके।दो वर्षों की प्रतीक्षा हुई पूरीइस दौरान जशपुर के वरिष्ठ पत्रकार संतोष चौधरी ने बताया कि वैभव साठे जल विज्ञान (Water Science), पानी की आणविक संरचना (Molecular Structure) और अल्कलाइन पानी के स्वास्थ्य लाभों पर 10,000 घंटे से अधिक का व्याख्यान दे चुके हैं।उन्होंने बताया कि उनके भाषण केवल वैज्ञानिक तथ्यों तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे रामचरितमानस, आयुर्वेद और मर्म विज्ञान के संदर्भों के साथ पानी की महत्ता को जोड़कर समझाते हैं।श्री चौधरी के अनुसार, जल विज्ञान पर इतना लंबा और निरंतर शोध आधारित वक्तव्य देने वाले वे एक अद्वितीय व्यक्तित्व हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें जशपुर आमंत्रित करने के प्रयास पिछले दो वर्षों से किए जा रहे थे, जो अब जाकर सफल हुए हैं।

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